ऑफिस गपशप (Office Gossip) कार्यस्थल का एक सामान्य हिस्सा है, इससे बचने और अपने करियर को सुरक्षित रखने के लिए रणनीतिक कदम उठाना जरूरी है।
लंच टेबल पर बैठते ही अगर बातचीत किसी कलीग की सैलरी, उसके तलाक या बॉस के साथ उसके "स्पेशल इक्वेशन" पर शिफ्ट हो जाए तो समझ लीजिए आप ऑफिस गॉसिप के बीचों-बीच खड़े हैं।
हर ऑफिस में यह होता है। चाहे वो कॉर्पोरेट टावर हो या छोटा सा स्टार्टअप, गॉसिप कहीं नहीं छूटता। सवाल ये नहीं कि गॉसिप रुकेगा या नहीं, सवाल ये है कि आप इसमें कितना घुसते हैं और कब ?
ऑफिस में गॉसिप होता क्यों है
कई बार गॉसिप सिर्फ टाइम पास होता है। चाय की चुस्की के साथ किसी की बात चलने लगती है बात उसकी नौकरी की उसकी निजी रिश्ते की हो सकती है लेकिन कई बार यही बातें किसी की पर्सनल लाइफ, परफॉर्मेंस या रिलेशनशिप स्टेटस पर बन जाती हैं।
यहीं से दिक्कत शुरू होती है। जो शुरुआत में मजाक लगता है, वो धीरे-धीरे किसी की रेपुटेशन को नुकसान पहुंचा सकता है।
जब बाउंड्री टूटने लगती है
बाउंड्री तब टूटती है जब आपको लगने लगे कि किसी को नीचा दिखाना है असली समस्या यह है कि ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं चलता कि वो कब लिसनर से पार्टिसिपेंट बन गए। एक हां - अच्छा फिर क्या हुआ पूछना सब गॉसिप को बढ़ावा देता है, भले ही नीयत बुरी न हो।
गॉसिप का असली नुकसान क्या है
US Chamber of Commerce की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऑफिस गॉसिप आपसी टेंशन और एक-दूसरे पर भरोसे की कमी बढ़ाता है, और इतने ही कर्मचारी अपने कलीग्स को कॉन्फिडेंशियल जानकारी देने में हिचकिचाते हैं। लोगों ने कहा है कि इसके असर और के करियर पर पड़ा
सोर्स: US Chamber of Commerce – The Impact of Workplace Gossip on Employee Trust and Morale
मतलब साफ है गॉसिप सिर्फ बातें नहीं हैं ये भरोसे टीम की एनर्जी और कभी-कभी करियर ग्रोथ तक को प्रभावित कर सकता है।
बाउंड्री सेट करने का सही तरीका
सबसे पहली बात बाउंड्री का मतलब रूखा अकड़ू बनना नहीं है। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि आप तय कर लें किस तरह की बातचीत में आप शामिल होंगे किसमें नहीं।
- अगर कोई कलीग किसी और के बारे में निगेटिव बात शुरू करे तो आप टॉपिक बदल सकते हैं। छोड़ो ये बताओ इतना भर कहना काफी है।
- अगर बात बहुत आगे बढ़ जाए तो सीधा कह दें मुझे ये सब डिस्कस करना ठीक नहीं लगता। शुरुआत में अजीब लगेगा, लेकिन यही एक लाइन आपकी इमेज को प्रोफेशनल बनाती है।
ना - कहना सीखना जरूरी है
बहुत से लोग गॉसिप में सिर्फ इसलिए शामिल होते हैं क्योंकि वो ग्रुप से कटना नहीं चाहते। लेकिन सच यह है कि जो लोग बाउंड्री रखते हैं उन्हें ऑफिस में ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है। कोई भी उस इंसान पर ज्यादा यकीन करता है जो उसकी पीठ पीछे बात नहीं करता।
ना कहना सीखना सिर्फ गॉसिप तक सीमित नहीं है। यह काम, कॉल न उठाने, पर्सनल सवालों का जवाब न देने, और हर छोटी बात पर सफाई न देने में भी लागू होता है।
जब आप खुद गॉसिप का टारगेट बन जाएं
पहली रिएक्शन गुस्सा हो सकती है। लेकिन सबसे जरूरी है शांत रहना। हर अफवाह का जवाब देना जरूरी नहीं। ज्यादातर गॉसिप अपने आप खत्म हो जाता है
अगर बात गंभीर हो जैसे कोई आपकी इमेज को खराब कर रहा हो तो सीधे उस इंसान से बात करना HR को इन्फॉर्म करना सही कदम है। चुप रहना हमेशा हल नहीं होता।
एक हेल्दी ऑफिस कल्चर कैसे बनता है
बाउंड्री सिर्फ जिम्मेदारी नहीं टीम कल्चर की भी बात है। जिन ऑफिसों में कम्युनिकेशन ओपन होता है, अपडेट्स सबको साथ मिलते है वहां गॉसिप अपने आप कम हो जाता है।
जब लोगों को जरूरी जानकारी समय पर मिलती है, तो उन्हें अंदाजे लगाने और कानाफूसी करने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
आखिर में बात इतनी सी है
गॉसिप पूरी तरह खत्म नहीं होगा, आप यह तय कर सकते हैं कि किस तरह की बातचीत में आप शामिल होंगे किसमें नहीं।
आपका क्या अनुभव रहा है ऑफिस गॉसिप को लेकर? कमेंट में जरूर शेयर करें,

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